झांसी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से मानवता को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक अज्ञात व्यक्ति की लाश 19 दिनों तक पोस्टमॉर्टम हाउस में सड़ती रही। प्रशासन और पुलिस की लापरवाही का आलम यह रहा कि जब किसी ने लाश की सुध नहीं ली, तो आखिरकार एक एम्बुलेंस ड्राइवर ने खुद उसका अंतिम संस्कार किया।
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क्या है पूरा मामला?
झांसी मेडिकल कॉलेज के पोस्टमॉर्टम हाउस में 19 दिन पहले एक अज्ञात शव लाया गया था। शव का पोस्टमॉर्टम तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद न तो पुलिस ने शव की पहचान के प्रयास किए और न ही कोई परिजन सामने आया। नियमानुसार, लावारिस लाश का अंतिम संस्कार प्रशासन की देखरेख में होना चाहिए था। लेकिन इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों ने शव को एक एम्बुलेंस ड्राइवर के हवाले कर दिया और उसी से अंतिम संस्कार कराने को कह दिया।
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मानवता की मिसाल बना एम्बुलेंस ड्राइवर
एम्बुलेंस ड्राइवर ने जब देखा कि शव लगातार सड़ रहा है और दुर्गंध फैल रही है, तो उसने खुद ही जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उसने लाश को कपड़े में लपेटा, एम्बुलेंस में लादा और श्मशान घाट पहुंचा। वहां उसने बोरे की तरह शव को बाहर निकाला, उसे पीठ पर लादकर लगभग 100 मीटर दूर चिता तक ले गया और विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया।
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प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
यह मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि 19 दिनों तक शव क्यों सड़ता रहा? पुलिस और प्रशासन ने समय रहते अंतिम संस्कार क्यों नहीं कराया? क्या संवेदनाएं अब सिस्टम से पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं?
कानूनी जिम्मेदारियाँ और नैतिक विफलता
इस घटना ने साफ कर दिया है कि जब प्रशासनिक व्यवस्था जवाबदेही से पीछे हटती है, तब इंसानियत की डोर आम नागरिकों के हाथ में रह जाती है। सवाल यह भी है कि क्या एक एम्बुलेंस ड्राइवर के कंधों पर ऐसी जिम्मेदारी डालना उचित था?
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