रिपोर्ट:- शरद मिश्रा “शरद”
लखीमपुर खीरी/निघासन: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता की तैनाती के बाद से हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पूरे जनपद में फर्जी हॉस्पिटल और पैथालॉजी लैब ऐसे उग आए हैं जैसे बरसात में कुकुरमुत्ते, लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पर मौन साधे हुए हैं।
निघासन बना ‘फर्जी चिकित्सा केंद्रों’ का गढ़
निघासन में तो हालात और भी चौंकाने वाले हैं। सीएचसी निघासन के ठीक सामने ही बिना रजिस्ट्रेशन के कई पैथालॉजी लैब खुलेआम संचालित हो रहे हैं, लेकिन सीएमओ कार्यालय और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की नज़रें इनसे लगातार बचती रही हैं।
डीएम के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं!
कुछ दिन पहले तहसील दिवस के मौके पर निघासन पहुंची डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीएमओ संतोष गुप्ता को स्पष्ट निर्देश दिए थे सीएचसी का निरीक्षण करें व फर्जी अस्पतालों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उसी दिन सीएमओ ने मौके पर निरीक्षण भी किया और मीडिया की मौजूदगी में बयान भी दिया। उन्होंने सीएचसी अधीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन आज तक एक भी फर्जी हॉस्पिटल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विभाग की भूमिका संदिग्ध!
जिस तरह से फर्जी हॉस्पिटल धड़ल्ले से चल रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है, उससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वाकई स्वास्थ्य विभाग की मौन सहमति इन सेंटरों को सुरक्षा दे रही है?
ग्राउंड रियलिटी:
- निघासन में गली-गली में अवैध लैब और क्लिनिक चल रहे हैं
- ना बोर्ड, ना लाइसेंस, ना विशेषज्ञ डॉक्टर
- आम जनता को झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया है
स्थानीय निवासी का कहना है कि “हमारी जान तो भगवान भरोसे है, यहां हर गली में डॉक्टर की डिग्री के बिना इलाज हो रहा है और कोई पूछने वाला नहीं।”
यूपी की फैमिली आईडी योजना:- हर परिवार को मिलेगा अपना डिजिटल पहचान पत्र।।