लखीमपुर खीरी की 5 ऐसी जगह जहां आप गर्मियों की छुट्टी में ले सकते है शिमला जैसा मजा।।

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लखीमपुर खीरी। तराई में बसा यह यूपी का सबसे बड़ा जिला है जो कई ऐतिहासिक धरोहरों के साथ धार्मिक स्थानों को भी अपने अंदर समेटे हुए है। यहां के लोग बाहर जाकर घूमना पसंद करते मगर शायद उन्हें ये नहीं पता कि लखीमपुर खीरी में कई जगह ऐसी है जो बेहद रोमांचकारी है। तो चलिए आज हम आपको यहां की 5 सबसे पॉपुलर जगह बताते है।

गोला फन सीटी वॉटर पार्क

लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ में स्थित गोला फन सिटी वॉटर पार्क हाल ही में खुला है और यह क्षेत्र के लोगों के लिए गर्मियों में ठंडक और मनोरंजन का बेहतरीन विकल्प बन गया है। यह पार्क गोला गोकर्णनाथ के अशोक चौराहे से लगभग 6 किलोमीटर दूर, फुटार रोड पर मालवा ढाबा के पास स्थित है। यहां के प्रमुख आकर्षण जैसे वाटर स्लाइड्स, स्विमिंग पूल, परिवारिक पिकनिक स्थल, प्राकृतिक हरियाली है।

थापर वॉटर पार्क

थापर वॉटर पार्क लखीमपुर खीरी जिले के पलिया कलां क्षेत्र में स्थित है, जो दुधवा नेशनल पार्क के निकट है। यह स्थल परिवारों और दोस्तों के लिए गर्मियों में ठंडक और मनोरंजन का बेहतरीन विकल्प प्रदान करता है।
यहाँ पर जल क्रीड़ा के विविध साधन उपलब्ध हैं, जैसे जल स्लाइड्स, स्विमिंग पूल और बच्चों के लिए विशेष खेल क्षेत्र। हर आयु वर्ग के लोगों के लिए यहाँ कुछ न कुछ मनोरंजन का साधन है। थापर वॉटर पार्क की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। यह स्थान न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।

दुधवा नेशनल पार्क

यह उत्तर प्रदेश राज्य के लखीमपुर खीरी ज़िले में स्थित है। यह पार्क भारत-नेपाल सीमा के पास तराई क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1977 में की गई थी। दुधवा पार्क वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
इस पार्क का क्षेत्रफल लगभग 490 वर्ग किलोमीटर है और यह दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, जिसमें किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य भी शामिल हैं। यहां पर प्रमुख रूप से बाघ, हाथी, बारहसिंगा (स्वैम्प डियर), तेंदुआ, घड़ियाल और विभिन्न प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। बारहसिंगा की एक विशिष्ट प्रजाति केवल यहीं पाई जाती है।
दुधवा की वनस्पति में साल, शीशम और अन्य मिश्रित पर्णपाती पेड़ शामिल हैं। सर्दियों में यह पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान होता है, क्योंकि यहां प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं। पार्क में भ्रमण का सबसे अच्छा समय नवम्बर से जून के बीच होता है। यह स्थान न केवल जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय शिक्षा और पर्यटन की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है।

 

मेढ़क मंदिर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में स्थित एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो अपनी अद्भुत संरचना के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह एक विशाल मेढ़क की आकृति पर बना हुआ है।माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण नवग्रहों की शांति और प्राकृतिक संतुलन के लिए कराया गया था। वास्तुशास्त्र और तंत्रशास्त्र के अनुसार, मेंढ़क को वर्षा और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। मंदिर की संरचना को देखकर यह साफ महसूस होता है कि इसे बहुत सोच-समझकर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बनाया गया है। मंदिर का मुख्य भवन एक विशाल मेंढ़क के ऊपर स्थित है, और यह निर्माण शैली भारत में दुर्लभ है। यहां हर साल शिव भक्तों का खासा जमावड़ा लगता है, खासकर महाशिवरात्रि के अवसर पर।

गुलरी पुरवा मंदिर

लखीमपुर खीरी की तहसील निघासन अंतर्गत गांव गुलरी पुरवा में बने इस मंदिर का नाम माँ राज राजेश्वरी दुर्गा मंदिर है। यहां क्षीरसागर बना है जिसमें विष्णु भगवान शेषनाग पर विराजमान है और माता लक्ष्मी उनके पैर दबा रही है। वहीं यहां पर अच्छा बगीचा है और कई अन्य देवी देवताओं के मंदिर है जो मन को शांति प्रदान करते है।

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